- प्रशासनिक सरपरस्ती में भ्रष्टाचारी का दुस्साहस
- किरनापुर तहसील कार्यालय में किसान सम्मान निधि के नाम पर खुली लूट
- किरनापुर-/ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई किसान सम्मान निधि योजना (जिसके तहत किसानों को प्रतिवर्ष 12,000 रु.की राशि दी जाती है अब भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का जरिया बन चुकी है। किरनापुर तहसील कार्यालय में योजना में नाम जुड़वाने और दस्तावेज प्रक्रिया पूरी करने के एवज में किसानों से सरेआम वसूली का खेल चल रहा है।
- 1,000 रु. से 13,000 रु. तक की अवैध मांग
- आरोप है कि किरनापुर तहसील कार्यालय में पदस्थ सहायक ई-गवर्नेस प्रबंधक (AEGM) रामशंकर पटले द्वारा सम्मान निधि की सूची में नाम जोड़ने और दस्तावेजों की प्रविष्टि के नाम पर गरीब और सीधे-साधे किसानों से एक हजार रु. से लेकर तेरह हजार रु. तक की अवैध उगाही की जा रही है। पीड़ित किसानों का कहना है कि पैसे देने के बावजूद महीनों बीत जाने पर भी सूची में नाम दर्ज नहीं किया जाता। चक्कर काट-काटकर परेशान किसान अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
- रिश्वत ली फिर भी सूची से गायब रहा नाम
- पीड़ित किसानों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनसे काम निपटाने का झांसा देकर मोटी रकम ऐंठ ली गई लेकिन इसके बाद भी उन्हें योजना की किस्तें नहीं मिल रही हैं। जब किसान अपने हक का जवाब मांगने कार्यालय जाते हैं तो उन्हें केवल आश्वासन और टालमटोल ही हाथ लगती है।
- कलेक्टर से शिकायत, पर नतीजा ‘ढाक के तीन पात’
- ऐसा नहीं है कि इस भ्रष्टाचार की जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं है। कुछ हिम्मतवर किसानों ने हिम्मत जुटाकर कलेक्टर कार्यालय बालाघाट में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
- रामशंकर पटले पहले भी घिर चुका है विवादों में
- स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रामशंकर पटले पर बीते कुछ सालों में भी अवैध वसूली की गंभीर शिकायतें दर्ज हुई थीं लेकिन राजस्व विभाग के संरक्षण के चलते हर बार उस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। तहसील स्तर की शह के कारण ही उसके हौसले इतने बुलंद हैं।
- उठते गंभीर सवाल
- गरीबों और अन्नदाताओं के हक पर डाका डालने वाले इस कर्मचारी पर प्रशासन सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
- क्या राजस्व विभाग की चुप्पी भ्रष्टाचार में उसकी मौन सहमति को दर्शाती है? बार-बार शिकायत के बावजूद जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? क्षेत्रीय
- पीड़ित और आक्रोशित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आरोपी बाबू के खिलाफ निष्पक्ष एवं त्वरित जांच बिठाकर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा ठगे गए किसानों की राशि वापस दिलाते हुए उन्हें सम्मान निधि का लाभ दिलाया जाए।
- इनका कहना है……….
- जमीन मेरे पिताजी के नाम पर है ओर मेरे पिताजी को किसान सम्मान निधि की राशि शुरू से नहीं मिल रही है पटवारी ने बताया की तहसील मे रामशंकर पटेल बाबू से मिलो तो मै कोई रामशंकर पटेल बाबू से तहसील कार्यालय किरनापुर मे मिला तो उन्होंने कहा काम हो जायेगा लेकिन पैसे लगेंगे मैंने कहा कितने तो उन्होंने कहा 17 सौ रु मैंने उन्हें दिनांक मई माह मे उनके केबिन मे 17 सौ रूपये दिए ओर बाकी तीन सौ रु. बाद मे देने की बात किया लेकिन आज दिनांक तक ना तो उन्होंने मेरे पिताजी का नाम जोड़ा ओर ना मेरे पिताजी के खाते मे किसान सम्मान निधि की राशि आई ज़ब भी फोन करो तो टाल मटोल करते है! आज मेरी उनसे बात हुई तो उन्होंने कहा की अब काम नहीं हो सकता फ़रवरी मे होगा कहते हुए मेरे फोन पे नंबर पर 17 सौ रु डाल दिए मै चाहता हुँ ऐसे भृष्ट कर्मचारी पर कार्यवाही हो ओर हमें किसान सम्मान निधि का लाभ मिले
- अर्जुन शेंन्द्रे (किसान) डुंडासिवनी
- जमीन मेरे नाम पर है ओर मुझे किसान सम्मान निधि की राशि नहीं मिल रही है इसके लिए मै तहसील मे पटेल बाबू से मिला उसने कहा किसान सम्मान निधि आ जाएगी लेकिन पाँच हजार रु. लेगेंगे मैंने उसे पाँच हजार रु भी दिए लेकिन उसने मेरा काम नहीं किया मैने शिकायत वर्तमान तहसीलदार से की फिर जिला कलेक्टर साहब के पास जनसुनवाई मे भी शिकायत किया की मुझसे पाँच हजार रु भी लिए गए की तुम्हारा किसान सम्मान निधि का पैसा मिल जायेगा लेकिन आज दिनांक तक मुझे कोई किसान सम्मान निधि की राशि नहीं मिली
- पटेल बाबू से कहो तो आ जाएगी कहकर गोल गोल घुमा रहा है जबकि विभाग भी उस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है!
- महेन्द्र मड़ावी (किसान) ग्राम कुंडे
- आपने किसानों से संबंधित समस्या मेरी जानकारी मे लाई है इस पर मेरे द्वारा एक जाँच कमेटी बनाकर जाँच करवाई जाएगी यदि संबंधित सहायक ई गवंर्नेन्स प्रबंधक रामशंकर पटेल दोषी होंगे तो निश्चित ही उन पर कार्यवाही की प्रक्रिया की जाएगी
- कमलचंद्र सिँहसार (अनुविभागीय अधिकारी राजस्व किरनापुर)
* तहसील कार्यालय में किसान सम्मान निधि के नाम पर खुली लूट *

