* बड़ी कार्रवाई, बाघिन T-27 का सफल रेस्क्यू, वन विहार भोपाल भेजी गई *

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कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की हालिया घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए समस्या जनित मानी गई 14 वर्षीय बाघिन टी-27 का सफल एवं सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे वन विहार, भोपाल के लिए रवाना कर दिया। यह कार्रवाई ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए की गई।

 गौरतलब है कि 2 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि में कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन अंतर्गत खापा बफर परिक्षेत्र की कुम्हादेही बीट के ग्राम पर्रापुर (स्कूल टोला) में बाघ के हमले में सुगनी बाई (पति बुधराम बैगा) की मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद मृतका के परिवार को अंत्येष्टि एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर परिवार को शासन की ओर से 8 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

  घटना के तुरंत बाद कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। कैमरा ट्रैप लगाए गए, गश्ती दलों द्वारा सघन सर्चिंग अभियान चलाया गया तथा हाथी दल की मदद से जंगल और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी की गई। इस दौरान लगभग 14 वर्ष आयु की मादा बाघिन टी-27 गांव के समीप विचरण करती हुई मिली। जांच में यह भी सामने आया कि बाघिन पहले भी ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास देखी गई थी तथा एक दिन पहले उसने गांव के पास शिकार करने का प्रयास भी किया था।

  इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश शासन से अनुमति प्राप्त करने के बाद सोमवार को कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी और उपसंचालक (बफर) अमिता के. बी. के मार्गदर्शन में हाथी दल की सहायता से बाघिन का सफल रेस्क्यू किया गया। वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बाघिन को सुरक्षित रूप से निश्‍चेत कर उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया।

   स्वास्थ्य परीक्षण में बाघिन के कैनाइन दांत अत्यधिक घिसे हुए पाए गए। अधिकारियों का मानना है कि इसी कारण वह आसान शिकार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास आ रही थी।

   रेस्क्यू के बाद बाघिन को विशेष परिवहन वाहन से सुरक्षित रूप से वन विहार, भोपाल भेज दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं वन्यजीवों की गतिविधियां दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें और किसी भी परिस्थिति में स्वयं जोखिम उठाने का प्रयास न करें। विभाग ने मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

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