दान में प्राप्त आदिवासी भूमि का छलपूर्वक विक्रय निरस्त, पुलिस जांच के आदेश

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कलेक्टर न्यायालय, बालाघाट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में ग्राम नेवरगांव, तहसील लालबर्रा स्थित भूदान भूमि के अवैध विक्रय को शून्य घोषित करते हुए संबंधित नामांतरण निरस्त कर दिया है। साथ ही भूमि को उसके मूल आदिवासी उत्तराधिकारियों के नाम पुनः दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। न्यायालय ने मामले में कथित धोखाधड़ी की जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को भी निर्देशित किया है।

 प्रकरण में वारासिवनी निवासी श्री सिकन्दर मिश्रा द्वारा प्रस्तुत शिकायत में बताया गया था कि लगभग 50 वर्ष पूर्व भूदान आंदोलन के अंतर्गत एक अनुसूचित जनजाति परिवार को प्रदान की गई कृषि भूमि, खसरा नंबर 2/12, का मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7-ख) के तहत आवश्यक कलेक्टर अनुमति प्राप्त किए बिना विक्रय कर दिया गया।

 सुनवाई के दौरान भूमि की उत्तराधिकारी श्रीमती जमुनाबाई उईके, श्रीमती आशा मडावी, श्रीमती उषा मडावी एवं श्रीमती जमुनाबाई पंधरे ने न्यायालय को बताया कि वारासिवनी निवासी जगमोहन सिंह उर्फ जग्गी निराला ने फौती नामांतरण कराने का आश्वासन देकर उन्हें विभिन्न कार्यालयों में ले जाकर उनकी जानकारी के बिना भूमि विक्रय संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए।

   कलेक्टर न्यायालय ने पाया कि भूदान पट्टाधारी की भूमि का अंतरण धारा 165 (7-ख) के अंतर्गत कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। ऐसी अनुमति के अभाव में किया गया अंतरण प्रारंभ से ही शून्य माना जाता है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि न तो अनुमति के लिए आवेदन किया गया था और न ही किसी प्रकार की स्वीकृति प्राप्त की गई थी।

  न्यायालय ने विक्रय पत्र के आधार पर किए गए नामांतरण एवं अंतरण को निरस्त करते हुए तहसीलदार लालबर्रा को 30 दिनों के भीतर भूमि को चारों उत्तराधिकारियों के नाम पूर्ववत दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शासन की ओर से संबंधित विक्रय पत्र निरस्तीकरण के लिए व्यवहार न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

  मामले में उप पंजीयक वारासिवनी द्वारा आवश्यक अनुमति की पुष्टि किए बिना विक्रय पत्र का पंजीयन किए जाने को गंभीरता से लेते हुए जिला पंजीयक बालाघाट को विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पुलिस अधीक्षक बालाघाट को कथित रूप से छलपूर्वक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की शिकायत की जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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