महिला दिवस विशेष : कान्हा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में महिलाओं का दमदार योगदान

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जहां एक ओर जंगलों में कार्य करना जोखिम और चुनौतियों से भरा होता है, वहीं बालाघाट जिले के बफर कान्हा टाइगर रिजर्व में महिलाएं अपनी साहस, जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा से वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा की मिसाल पेश कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च) के अवसर पर इन महिला वन कर्मियों का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

  बफर कान्हा टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर सुश्री अमिता के.बी. (आईएफएस) के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में महिला कर्मचारियों की एक टीम पूरी जिम्मेदारी के साथ जंगल की सुरक्षा में जुटी हुई है। इस टीम में खापा रेंजर सुश्री संध्या देशकर, माना बीट की बीट गार्ड वनरक्षक सुश्री विनीता मरावी, भैसानघाट बेरियर की वनरक्षक श्रीमती सोनम झारिया तथा सुरक्षा श्रमिक श्रीमती प्रेमा यादव और श्रीमती विमला कुशरे शामिल हैं।

  ये सभी महिलाएं टाइगर रिजर्व में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखने, वन क्षेत्र की निगरानी करने और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही हैं। जंगलों में गश्त करना, बेरियर पर निगरानी रखना और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना उनके रोजमर्रा के कार्यों का हिस्सा है। कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद वे पूरी लगन और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

   जंगल में कार्य करना महिलाओं के लिए आसान नहीं होता, लेकिन इन महिला कर्मचारियों ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और समर्पण के बल पर कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। ये महिलाएं अपने शासकीय दायित्वों के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं।

   विशेष बात यह भी है कि बालाघाट जिला मध्यप्रदेश का ऐसा जिला है जहां स्त्री-पुरुष लिंगानुपात सबसे अधिक है। यहां 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1022 है। यही सकारात्मक सामाजिक वातावरण यहां के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के रूप में दिखाई देता है। बफर कान्हा टाइगर रिजर्व में महिला कर्मचारियों की बढ़ती संख्या भी इसका एक उदाहरण है।


  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन महिला वन कर्मियों की कार्यनिष्ठा और साहस यह संदेश देता है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जंगल की सुरक्षा में जुटी ये महिलाएं वास्तव में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल हैं।

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