- बच्चों की बढ़ती संख्या से शुरुआती दौर में बिगड़ी व्यवस्था, अब जिला अस्पताल में पर्याप्त इंतजाम : सिविल सर्जन
- करीब 400 बच्चों का किया जा चुका उपचार, एक बच्चे की हुई मौत; बाकी सभी स्वस्थ होकर लौटे घर
- बालाघाट। जिले के आदिवासी अंचलों में बच्चों के लगातार बीमार होने और उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल लाए जाने के बीच बुधवार 2 सितंबर को जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने प्रेस वार्ता आयोजित कर अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या सीमित थी, इसलिए उपलब्ध संसाधनों के आधार पर व्यवस्थाएं पर्याप्त थीं। लेकिन अचानक बड़ी संख्या में बच्चों के अस्पताल पहुंचने से प्रारंभिक दौर में व्यवस्थाओं पर दबाव आया और कुछ समय के लिए स्थिति अव्यवस्थित हुई। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल व्यवस्थाओं को संभालते हुए अतिरिक्त इंतजाम किए और अब बच्चों के उपचार के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।
- सिविल सर्जन डॉ. जैन ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों से बीमार बच्चों के लगातार जिला अस्पताल पहुंचने के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी। इसके मद्देनजर अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों को व्यवस्थित किया गया और भर्ती बच्चों के उपचार, जांच तथा देखभाल के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार को लेकर किसी प्रकार की कमी नहीं है और मरीजों एवं उनके परिजनों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- करीब 400 बच्चे पहुंचे अस्पताल
- डॉ. निलय जैन के अनुसार अब तक लगभग 400 बच्चों को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश बच्चे उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में उपचार के दौरान केवल एक बच्चे की मौत हुई है, जबकि अन्य बच्चों को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दी गई।
- उन्होंने बताया कि जिस बच्चे की उपचार के दौरान मृत्यु हुई, उसे कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं थीं। बच्चे की स्थिति गंभीर होने के कारण चिकित्सकों द्वारा उपचार किया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य बच्चों को आवश्यक उपचार और चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराई गई, जिसके बाद वे स्वस्थ होकर घर लौटे हैं।
- अचानक बढ़ी संख्या से आया था दबाव
- सिविल सर्जन ने बताया कि शुरुआती दिनों में जब इक्का-दुक्का बच्चे उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे थे, तब उपलब्ध संसाधनों के अनुसार पर्याप्त व्यवस्थाएं थीं। बाद में जब आदिवासी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ अस्पताल पहुंचने लगे तो अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर दबाव आया। उन्होंने माना कि इस दौरान शुरुआत में कुछ व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति को शीघ्र नियंत्रित कर लिया।
- उन्होंने कहा कि बच्चों की संख्या बढ़ने के बाद चिकित्सकीय स्टाफ, बेड, उपचार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया गया। वर्तमान में जिला अस्पताल में भर्ती बच्चों के उपचार के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- कई कारणों से बिगड़ सकती है बच्चों की सेहत
- आदिवासी अंचलों में लगातार बच्चों की तबीयत खराब होने के कारणों को लेकर सिविल सर्जन ने कहा कि किसी बच्चे का स्वास्थ्य खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने शुद्ध पेयजल की उपलब्धता, आसपास का वातावरण, खान-पान और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि यदि किसी क्षेत्र में स्वास्थ्य के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध नहीं हों तो एक बच्चे के बाद दूसरे बच्चे के बीमार होने की स्थिति बन सकती है और धीरे-धीरे मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
- उन्होंने कहा कि आदिवासी अंचलों से बच्चों के लगातार अस्पताल पहुंचने के पीछे भी कई परिस्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। ऐसे में केवल एक कारण को इसके लिए जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा। बच्चों की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय जांच और उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- भर्ती बच्चों और परिजनों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएं
- डॉ. जैन ने कहा कि जिला अस्पताल में भर्ती बच्चों की नियमित निगरानी की जा रही है। चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रहे हैं और आवश्यकता के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचने वाले परिजनों को भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार को लेकर पर्याप्त व्यवस्था है। किसी भी बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों द्वारा तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का पूरा ध्यान बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और उन्हें स्वस्थ अवस्था में घर भेजने पर है।
* आदिवासी अंचलों में लगातार बच्चों की तबीयत खराब होने के कारणों को लेकर *

