पिछले दिनों बालाघाट जिले के कान्हा नेशनल पार्क के बफर जोन से लगे पर्रापुर गांव में वन्य प्राणी बाघ के हमले में एक महिला की मौत… और उसके बाद मालखेड़ी गांव में किसान पर बाघ के हमले की गंभीर घटना को लेकर परसवाड़ा विधायक मधु भगत का वन विभाग की कार्यप्राणी को सवालों के घेरे में लेते हुए एक विवादित बयान दिया था ।
वॉयसोवर – जिस पर समाजसेवी रामेश्वर कटरे ने तीखा पलटवार किया है । विधायक मधु भगत ने अपने बयान में कहा था कि आदिवासी बैगाओं का निशान तीर कमान है । यदि वन विभाग ने वन्य प्राणियों द्वारा ग्रामीणों पर हमले को रोकने कोई समुचित कदम नहीं उठाया तो ये तीर कमान से जंगली जानवरों का शिकार करने लगेंगे जिसमें मैं इनके साथ सबसे आगे खड़ा नजर आऊंगा । विधायक के इसी बयान पर रामेश्वर कटरे ने सवाल उठाया कि अगर कोई आदिवासी कानून अपने हाथ में लेकर जंगली जानवर का शिकार करता है, तो आखिर उसे कानूनी कार्रवाई से कौन बचाएगा? रामेश्वर कटरे ने विधायक मधु भगत पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज आदिवासी समाज शिक्षा और अपनी संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। आदिवासी समाज के युवा पढ़-लिखकर अधिकारी बन रहे हैं और समाज को आगे ले जाने का काम कर रहे हैं.. ऐसे में इस तरह के बयान देकर आदिवासी समाज के लोगों को उकसाने का प्रयास नहीं होना चाहिए! कटरे ने आदिवासी समाज की आस्था का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय बाघ को सिर्फ एक जंगली जानवर नहीं मानता, बल्कि कई स्थानों पर बाघ को “बाघ देवता” के रूप में सम्मान देता है। ऐसे में बाघ और आदिवासी समाज के बीच संघर्ष को केवल शिकार या हिंसा के नजरिए से देखने के बजाय… मानव-वन्यजीव संघर्ष की असली समस्या का समाधान तलाशने की जरूरत है ।
बाइट – रामेश्वर कटरे (समाजसेवी)

