मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने लालबर्रा में अवैध रूप से रोगियों को भर्ती कर उपचार करने के मामले में शिवशक्ति दवाखाना की संचालक डॉ. उमा बिसेन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि क्यों न उनके क्लीनिक को बंद कर दिया जाए और उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाए। डॉ. उमा बिसेन को 07 दिनों के भीतर समक्ष में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गए है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर 27 फरवरी 2026 को जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. रित्विक पटेल द्वारा अपराह्न 3:45 बजे बालाघाट रोड लालबर्रा स्थित शिवशक्ति दवाखाना का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्लीनिक में संजय बिसेन उपस्थित पाए गए, जिन्होंने अपनी योग्यता बी.ई.एम.एस. (इलेक्ट्रोहोम्योपैथी) बताई। निरीक्षण के समय भवन का किराया अनुबंध पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि डॉ. उमा बिसेन द्वारा श्रीमती एस.एम.देव होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज बालाघाट से माह जून 2018 में बी.एच.एम.एस. योग्यता प्राप्त कर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से दिनांक 06 फरवरी 2021 को उपाधि प्राप्त की गई है, उक्त बी.एच.एम.एस. योग्यता का राज्य होम्यापैथी परिषद मध्यप्रदेश भोपाल में पंजीयन क्रमांक 25691 दिनांक 13 अक्टूबर 2020 है, जिसकी वैद्यता अवधि दिनांक 22 दिसम्बर 2030 तक है।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि दवाखाना के प्रथम कक्ष में रोगी पंजीयन कक्ष, द्वितीय कक्ष में चिकित्सकीय परामर्श कक्ष तथा तृतीय कक्ष में तीन बिस्तर लगे हुए थे। हालांकि निरीक्षण के समय कोई भी रोगी भर्ती नहीं पाया गया और क्लीनिक में एलोपैथिक दवाइयां भी नहीं मिलीं। साथ ही क्लीनिक परिसर में किसी भी चिकित्सक की शैक्षणिक योग्यता या पंजीयन प्रमाण पत्र प्रदर्शित नहीं पाए गए। जांच दल को दवाखाना में रोगियों के उपचार या भर्ती के लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति भी उपलब्ध नहीं कराई गई। नियमों के विरुद्ध क्लीनिक संचालन पाए जाने पर उपस्थित व्यक्ति द्वारा दवाखाना को फिलहाल बंद कर विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद ही पुनः संचालन शुरू करने का आश्वासन दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने इन तथ्यों के आधार पर दवाखाना संचालक डॉ. उमा बिसेन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिवस के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

