*अनाज से स्वास्थ्य व आय बढ़ाने पर जोर* कृषि वैज्ञानिक रमेश अमुले एवं पूजा गोस्वामी ने किसानों को मिलेट्स (कोदो, कुटकी, रागी आदि) की उन्नत खेती तकनीक, “

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देवगांव में मिलेट्स कार्यशाला: मोटे अनाज से स्वास्थ्य व आय बढ़ाने पर जोर, 500 से अधिक किसान हुए शामिल

   किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत राज्य मिलेट मिशन योजना के तहत विकासखंड बिरसा की ग्राम पंचायत देवगांव (द) में मिलेट्स पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर श्री मृणाल मीना के मार्गदर्शन एवं उपसंचालक कृषि फूलसिंह मालवीय के निर्देशन में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

  कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। कृषि सभापति धरमसिंह मरकाम, जनपद सदस्य विपतलाल राठौर, सरपंच सुनई मरकाम (देवगांव), सरपंच मुलायम सिंह परते (अजगरा), उपसरपंच सरला एक्का सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

   इस दौरान कृषि वैज्ञानिक रमेश अमुले एवं पूजा गोस्वामी ने किसानों को मिलेट्स (कोदो, कुटकी, रागी आदि) की उन्नत खेती तकनीक, “कल्चर ऑफ प्रैक्टिस”, पोषण लाभ एवं वैश्विक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं अनुविभागीय कृषि अधिकारी सी.एस. धुर्वे ने मिलेट्स की प्रोसेसिंग, विपणन और मूल्य संवर्धन के विषय में मार्गदर्शन दिया।

 वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी योगेश वाहने ने किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों की जानकारी देते हुए किसानों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही परसवाड़ा विकासखंड के उन्नतशील कृषक सुमरण सिंह मेरावी ने अपने अनुभव साझा कर किसानों को मिलेट्स की खेती के लाभ बताए।

  कार्यशाला में बैहर, बिरसा, परसवाड़ा और लांजी से आए लगभग 400 से 500 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर विभिन्न स्टॉल एवं प्रदर्शनी भी लगाई गई, जो आकर्षण का केंद्र रही। बिरसा क्रॉप प्रोड्यूसर समूह द्वारा नरेंद्र कुमार हनुमत ने स्टॉल लगाया, वहीं स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष कुंदा देशमुख द्वारा मिलेट्स व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। आशीष रहांगडाले द्वारा पारंपरिक मिलेट्स यूनिट्स एवं तेल प्रदर्शनी भी प्रस्तुत की गई।

     कार्यक्रम के दौरान किसानों ने बताया कि वे वन भूमि पर कोदो, कुटकी एवं रागी की खेती करते हैं, लेकिन गिरदावरी नहीं होने के कारण उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इस पर अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।


  इस कार्यशाला के माध्यम से विशेष रूप से आदिवासी अंचल के किसानों में मिलेट्स फसलों के प्रति जागरूकता और उत्साह बढ़ा है। विशेषज्ञों ने कहा कि मिलेट्स न केवल पोषण का बेहतर स्रोत हैं, बल्कि कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसलें भी हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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