लालबर्रा वन परिक्षेत्र में प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया अंतिम संस्कार
बालाघाट जिले के वन परिक्षेत्र लालबर्रा अंतर्गत कक्ष क्रमांक 443, बीट बिहियाटिकुर में बुधवार को एक नर बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त बालाघाट एवं दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट के वन मंडल अधिकारी के निर्देशन में वन विभाग का अमला तत्काल घटनास्थल पर पहुंचा और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू की।
घटनास्थल पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के प्रतिनिधि, फील्ड बायोलॉजिस्ट, वन्यजीव चिकित्सकों तथा वन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से सूक्ष्म निरीक्षण किया। जांच के दौरान बाघ के सभी अंग, जिनमें नाखून, दांत और मूंछें शामिल हैं, सुरक्षित पाए गए। अधिकारियों ने घटनास्थल का पंचनामा तैयार कर आवश्यक फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किए।
इसके बाद एनटीसीए के निर्धारित प्रोटोकॉल एवं भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वन्यजीव चिकित्सकों द्वारा बाघ का पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान रक्त, विसरा, ऊतक, बाल सहित आवश्यक जैविक नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए सुरक्षित कर सीलबंद किया गया। संपूर्ण प्रक्रिया अधिकारियों की उपस्थिति में नियमानुसार संपन्न हुई। पोस्टमार्टम के उपरांत बाघ के शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों के अनुसार प्रथम दृष्टया बाघ का शव लगभग एक दिन पुराना प्रतीत होता है तथा उसकी मृत्यु आपसी क्षेत्रीय संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) के कारण होने की संभावना है। हालांकि, मृत्यु के वास्तविक कारणों की अंतिम पुष्टि फॉरेंसिक एवं अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही की जाएगी।
वन विभाग ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा वन्यजीव संरक्षण से संबंधित सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

