सच के साथ खड़ी रही पुलिस, गूँजा – पुलिस प्रशासन जिंदाबाद”
13 फरवरी की रात लगभग 10 बजे जितेन्द्र पटले अपने भाई धनलाल के साथ थाने पहुँचा और आरोप लगाया कि योगेश नगपुरे ने धनलाल को चाकू से मारने दौड़ाया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत दोनों पक्षों को बुलाकर पूछताछ की।
पूछताछ में योगेश ने आरोपों को झूठा बताया और कहा कि वह पूरे दिन सीसीटीवी कैमरे में अन्य स्थान पर था। इसके बाद जब धनलाल से अलग से बात की गई तो उसने भी स्वीकार किया कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई थी और भूमि विवाद के कारण वह थाने गया था। इससे स्पष्ट हो गया कि चाकूबाजी की बात सही नहीं थी।
यह भी तथ्य है कि संबंधित भूमि विवाद में न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया है कि जितेन्द्र पटले विवादित भूमि में अनधिकृत प्रवेश न करे। इसके बावजूद वह कई बार भूमि में प्रवेश करता रहा है, जिससे विवाद की स्थिति बनी रहती है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जितेन्द्र पटले के विरुद्ध पूर्व में मारपीट के कई प्रकरण दर्ज हैं और उसके आचरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्यवाही की तैयारी भी की गई है। ऐसे व्यक्ति के पक्ष में खुलकर समर्थन करना कई लोगों को उचित नहीं लगा।
इसके बाद स्थानीय नेता कंकर मुंजारे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर आरोप लगाए कि रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। जबकि वास्तविकता यह सामने आई कि जिस घटना की शिकायत की गई थी, वह हुई ही नहीं थी।
इसी बात को लेकर कई नागरिकों में नाराजगी हुई और वे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे। वहाँ लोगों ने “पुलिस प्रशासन जिंदाबाद” और “कंकर मुंजारे मुर्दाबाद” के नारे लगाए। लोगों का कहना था कि बिना पूरी सच्चाई जाने पुलिस को गलत ठहराना और ऐसे व्यक्ति का समर्थन करना, जिसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, ठीक नहीं है।
जनता की मांग है कि भूमि विवाद को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए और न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।

