कलेक्टर श्री मृणाल मीना की अध्यक्षता में 05 फरवरी को किसान कल्याण एवं कृषि विकास, कृषि अभियांत्रिकी, उद्यानिकी, पशु चिकित्सा सेवा एवं मत्स्योद्योग विभाग के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभागीय योजनाओं की वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक सराफ भी उपस्थित थे।
बैठक मे कृषि विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान पाया गया कि जिले में धान फसल का रकबा बढा है। जबकि शासन द्वारा धान फसल का रकबा कम कर उसके स्थान पर अन्य फसलों का रकबा बढाने के निर्देश दिये गए है। धान फसल का रकबा बढने के कारण जिले में यूरियॉ की खपत भी बढी है। कलेक्टर श्री मीना ने इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कृषि विभाग के अमले द्वारा इस दिशा में संतोषजनक कार्य नही किया गया है। इसी प्रकार कोदो कुटकी की गिरदावरी एवं इसकी समर्थन मूल्य पर खरीदी की मात्रा में आनुपातिक समानता नही पायी जा रही है। इसके लिए संबंधित विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों को समर्थन मूल्य पर कोदो कुटकी विक्रय करने वाले किसानों का सत्यापन कर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गए।
बैठक में पराली प्रबंधन की समीक्षा के दौरान लांजी विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी कुलदीप गनवीर का कार्य संतोषजनक नही पाया गया। इसी प्रकार फार्मर रजिस्ट्री में भी उनका कार्य संतोषजनक नही था। इस पर कलेक्टर श्री मीना ने वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी कुलदीप गनवीर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। फार्मर रजिस्ट्री में संतोषजनक कार्य नही पाये जाने के कारण बालाघाट विकासखंड की वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी प्रतिभा टेंभरे एवं किरनापुर के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिये गए।
बैठक में कृषि विभाग एवं कृषि अभियांत्रिकी द्वारा उन्नत कृषि यंत्र वितरण के लक्ष्य के अनुरूप बहुत कम प्रकरण तैयार करने पर कलेक्टर द्वारा नाराजगी जाहिर की गई और निर्देशित किया गया कि 15 दिनों के भीतर लक्ष्य पूर्ति करें। लक्ष्य पूर्ति नही करने पर यह माना जाएगा कि पराली प्रबंधन के लिए जिले में इन उपकरणों की आवश्यकता नही है। पूर्व में दिये गए निर्देशों के बाद भी हैप्पी सीडर, सुपर सीडर के प्रकरण लक्ष्य के अनुरूप तैयार नही किये जाने पर उपसंचालक कृषि एवं कृषि अभियांत्रिकी के अधिकारी की परफारमेंस एप्रेजल रिपोर्ट में विपरित टीप लिखी जाएगी। दोनो अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि यदि वे लक्ष्य पूर्ण करने में सक्षम नही है तो विभागीय वरिष्ठ अधिकारियो से जिले का लक्ष्य हटाने के लिए कार्यवाही करवाऍ।
कलेक्टर श्री मीना ने बैठक में निर्देशित किया कि जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करे और जैविक उत्पादों के विक्रय के लिए हर विकासखंड में विक्रय केंद्र प्रारंभ करें। इस दौरान बताया गया कि बालाघाट नगरीय क्षेत्र में कोतवाली के सामने कृषि विभाग द्वारा प्रारंभ किये गए जैविक विक्रय केंद्र से अब तक 150 क्विंटल चिन्नौर चावल का विक्रय किया जा चुका है। वारासिवनी में भी मुख्य सडक के किनारे या शहर के मुख्य स्थल पर जैविक उत्पाद विक्रय केंद्र प्रारंभ करने के निर्देश दिये गए, इसके लिए वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी को वारासिवनी एसडीएम से सम्पर्क करने कहा गया। खैरलांजी विकासखंड में जैविक खेती के लिए बनाये जा रहे जैविक कीटनाशक एवं खाद का जनपद सीईओ से निरीक्षण कराने के निर्देश दिये गए और कहा गया कि जिले के सभी विकासखंडों में संबंधित एसडीएम से उनका भ्रमण कराया जाए।
उद्यानिकी विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत ऋण वितरण एवं उन्नत यंत्रों के वितरण का लक्ष 15 दिनों में अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिये गए। इसमें विकासखंड बिरसा, लांजी एवं परसवाडा में कम प्रकरण स्वीकृत करने पर यहां के उद्यान विस्तार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिये गए। सहायक संचालक उद्यान को निर्देशित किया गया कि जिले में मखाने की खेती के लिए किसानों का चयन कर उन्हें बीज एवं प्रशिक्षण शीघ्र दिलाए। सहायक संचालक मत्स्योद्योग को निर्देशित किया गया कि जिले में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बने समस्त तालाबों को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर देने की कार्यवाही करें। उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवा को निर्देशित किया गया कि पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन संबंधी योजनाओं में ऋण वितरण का लक्ष 15 दिनों के भीतर पूर्ण करें।
बैठक में उपसंचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय, सहायक संचालक श्री राजेश खोब्रागढे, सहायक संचालक उद्यानिकी श्री क्षितिज कराडे, सहायक संचालक मत्स्योद्योग सुश्री पूजा रोडगे, उपसंचालक पशु चिकित्सा डॉ. राजेश्वर नगपुरे, सभी विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एवं उद्यान विस्तार अधिकारी उपस्थित थे।

