गोदाम भरे, मशीन बंद — सर्वर फेल होने से बालाघाट में राशन व्यवस्था ठप

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न हितग्राही दोषी, न सेल्समैन; भोपाल स्तर के सिस्टम पर उठे सवाल
बालाघाट। बालाघाट जिले के लालबर्रा जनपद सहित ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक गंभीर संकट से गुजर रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि राशन सोसायटी में अनाज भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, इसके बावजूद हजारों हितग्राही राशन से वंचित हैं। वजह साफ है—ई-पॉस मशीनों से जुड़ा सर्वर सिस्टम पूरी तरह फेल। ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़ाना यही हालात हैं। सुबह से महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर राशन दुकान के बाहर कतार में खड़े रहते हैं, लेकिन मशीन सर्वर से कनेक्ट नहीं हो पाती। अंगूठा लगना तो दूर, एंट्री तक नहीं हो पाती और शाम होते-होते लोग खाली हाथ और निराश लौटने को मजबूर हैं। सेल्समैन बेबस, जनता आक्रोश में इस संकट में सबसे ज्यादा दबाव सोसायटी में कार्यरत सेल्समैन पर पड़ रहा है। राशन गोदाम में रखा है, वितरण की पूरी तैयारी है, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम बंद होने से नियमों के तहत वितरण असंभव हो गया है। सवाल सीधा है—जब मशीन ही नहीं चलेगी, तो सेल्समैन क्या करे? भोपाल स्तर पर अटका मामला मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, जहां से जानकारी दी गई कि यह तकनीकी समस्याsr भोपाल स्तर पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सर्वर से जुड़ी हुई है।अधिकारियों का कहना है कि समस्या के निराकरण के प्रयास जारी हैं, लेकिन तब तक ग्रामीण जनता रोज़ इस सिस्टम फेल्योर की कीमत चुका रही है। यह लापरवाही नहीं, सिस्टम फेल्योर है इस पूरे मामले में यह साफ हो चुका है कि न हितग्राही की कोई गलती है न सेल्समैन की न ही राशन की कमी है पूरा संकट तकनीकी सिस्टम और सर्वर फेल्योर का परिणाम है। इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर जनता और कर्मचारियों को जवाबदेह ठहराया जाना सबसे बड़ा अन्याय है। मांग—तुरंत सर्वर चालू हो, वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए ग्रामीणों और सोसायटी प्रबंधन की एकजुट मांग है कि भोपाल स्तर से सर्वर को तत्काल सुचारु किया जाए समस्या के स्थायी समाधान तक ऑफलाइन या वैकल्पिक वितरण व्यवस्था लागू की जाए सेल्समैन को अनावश्यक दबाव और आरोपों से मुक्त किया जाए जब अनाज मौजूद है, दुकान खुली है, तो फिर गरीब का राशन मशीन की गलती से क्यों रुके अब निगाहें प्रशासन और भोपाल स्तर की तकनीकी एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे कब तक इस गंभीर संकट का समाधान कर ग्रामीण जनता को राहत देते हैं

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