बालाघाट जिला नक्सल मुक्त हुआ नहीं कि यहां पर बैहर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत दलदला के पचामा दादर अनुसूचित क्षेत्र में दादर बॉक्साइड ब्लॉक व लोह अयस्क खनन के लिये 60 हेक्टेयर में खनन की अनुमति सरकार की ओर से दी गई है। जिसके तहत आगामी 18 फरवरी को जनसुनवाई की तारीख नियत की गई हैं। इस तारीख के सामने आते ही यहां पर विरोध के स्वर सामने आ गये हैं।
वॉयसोवर – यहां के आदिवासी अपने क्षेत्र के विधायक संजय उईके के नेतृत्व में संस्कृति,प्रकृति और वन्यजीवों को बचाने सरकार से आरपार की लड़ाई के मूंड में देखे जा रहे हैं। जिन्होने 18 फरवरी को होने वाली जनसुनवाई का पुरजोर विरोध करने का मन बना लिया है। इस संबंध मे कांग्रेस के जिलाध्यक्ष व बैहर विधायक संजय उईके का कहना हैं कि बालाघाट जिले का आदिवासी बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र बैहर पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित है । जिसके चलते यहां वन अधिकार नियम और पेसा एक्ट लागू है । साथ ही बैहर विधानसभा क्षेत्र आदिवासियों के लिए आरक्षित है । ऐसे में इन इलाकों में किसी भी तरह के खनन अथवा निर्माण कार्यों के लिए संबंधित ग्राम पंचायत का प्रस्ताव या दूसरे शब्दों में कहें तो एनओसी लेना अनिवार्य है। दादर पचामा परिक्षेत्र में पिछले दिनों पर्यावरण विभाग और खनिज विभाग द्वारा खनन के संबंध में दावे आपत्ति मांगे गए थे जिसमें सभी ग्राम पंचायतों ने खनन के विरोध में आपत्तियां दर्ज कराई थी । इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने पचामा दादर में 60 हेक्टेयर जंगल और पहाड़ो में बॉक्साइड और लौह अयस्क खनन की मंजूरी दे दी है । जिसको लेकर हमारी आपत्ति हैं और आपत्ति को लेकर उन्होने अलग-अलग बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्टेट माईनिंग कार्पोरेशन द्वारा तैयार की गई खनन को लेकर जो रिपोर्ट ग्रामीणों को प्रदाय की गई वह स्थानीय भाषा में नहीं हैं बल्कि अंगे्रजी भाषा में दी गई हैं। यहां पर वनाधिकार कानून लागू है और रिपोर्ट में यह बताया गया कि संबंधित क्षेत्र में वनाधिकार कानून लागू नहीं हैं। संजय उईके ने कहा कि यह क्षेत्र ही नहीं देश में वनाधिकार कानून व पेसा कानून लागू हैं। यह क्षेत्र पांचवी अनूसूची में शामिल हैं। कान्हा व पेच कारीडोर होने से वन्यप्राणियों का विचरण व रहवास होता हैं। जिसे छुपाया गया हैं। जो रिपोर्ट तैयार की गई वह गलत है व साक्ष्य को छुपाया गया हैं। यहां पर निकट में प्राकृतिक जल स्रोत है जिसे छुपाया गया हैं। वन व वन्यप्राणी की संख्या हैं जिसे छुपाया गया हैं। स्थान को दूसरी जगह पर बताया गया हैं।
विधायक संजय उईके ने कहा कि आदिवासी ग्रामीणों के जीवन का मुख्य आधार ही जंगल और प्राकृतिक जल स्त्रोत है और इनका जीवन रोजी रोटी वनो पर निर्भर है। लेकिन सरकार झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत कर निजी क्षेत्र की कंपनियों और म. प्र. स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन को खनन हेतु मंजूरी दे रही है ,दादर पचामा के जंगल और पहाड़ो में माइनिंग से पर्यावरण ,वन्यजीव ,जैव विविधता आदिवासीयो का जीवन संकट में पड़ जायेग। जल जंगल और जमीन को बचाने के लिए यह आंदोलन और संघर्ष किया जा रहा हैं।
बाईट- संजय उईके (विधायक बैहर)

